सावन का दूसरा सोमवार 2026 (sawan ka dusra somwar) में 10 अगस्त, सोमवार को है। उत्तर भारत में यह सावन का दूसरा सोमवार (dusra sawan somvar) माना जाएगा। इस दिन सोम प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है, इसलिए शिव पूजा का महत्व बढ़ जाता है। आइए जानते हैं तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम, कथा और मंत्र।
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मुख्य बिंदु
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सावन का दूसरा सोमवार 2026 (sawan ka dusra somwar): 10 अगस्त, सोमवार।
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उत्तर भारत में सावन सोमवार की तिथियां: 3, 10, 17 और 24 अगस्त।
- 10 अगस्त को सोम प्रदोष व्रत का संयोग है।
- प्रदोष काल में शिव पूजा का समय शहर के अनुसार लगभग शाम 07:09 बजे से 9:20 बजे तक रहेगा।
- व्रत, जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण, मंत्र जाप और कथा श्रवण प्रमुख धार्मिक परंपराएं हैं।
सावन का दूसरा सोमवार 2026 कब है?
सावन का दूसरा सोमवार 2026 (sawan ka dusra somwar) में 10 अगस्त 2026 को है। उत्तर भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड में सावन सोमवार 3, 10, 17 और 24 अगस्त को पड़ेंगे। श्रावण मास की पूरी तिथि, व्रत और पूजा से जुड़ी जानकारी के लिए shravan month 2026 की यह विस्तृत गाइड भी देखें। कुछ दक्षिण और पश्चिम भारतीय क्षेत्रों में अमांत पंचांग के कारण तारीखें अलग हो सकती हैं।
Quick Answer Table
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जानकारी
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विवरण
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दूसरा सावन सोमवार
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10 अगस्त 2026, सोमवार
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व्रत
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सावन सोमवार व्रत
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विशेष संयोग
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सोम प्रदोष व्रत
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तिथि
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श्रावण कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
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प्रदोष पूजा
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लगभग शाम 7:09 बजे से 9:19 बजे तक
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मुख्य आराध्य
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भगवान शिव
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सावन के दूसरे सोमवार का शुभ मुहूर्त
10 अगस्त को स्नान और संकल्प के बाद भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। पंचांग गणनाओं में अभिजीत मुहूर्त करीब दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक बताया गया है। वहीं सोम प्रदोष के कारण शाम 7:05 बजे से 9:19 बजे तक प्रदोष पूजा का विशेष समय माना गया है।
सावन के दूसरे सोमवार का महत्व क्या है?
सावन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। सावन का दूसरा सोमवार (sawan ka dusra somwar) होने के कारण इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना, बेलपत्र चढ़ाना, मंत्र जाप करना और व्रत रखना शिव भक्ति की प्रमुख परंपराएं हैं। 10 अगस्त को सोम प्रदोष का संयोग होने से शाम की शिव पूजा भी विशेष मानी जाती है।
सावन के दूसरे सोमवार का धार्मिक महत्व
- भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक।
- व्रत और सात्त्विक आचरण का पालन।
- बेलपत्र, पुष्प और पारंपरिक सामग्री अर्पित करना।
- ॐ नमः शिवाय का जाप और कथा श्रवण।
- सोम प्रदोष के कारण प्रदोष काल में विशेष शिव पूजा।
दूसरे सावन सोमवार की पूजा सामग्री क्या रखें?
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पूजा सामग्री
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उपयोग
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जल
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अभिषेक
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दूध
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अभिषेक
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बेलपत्र
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शिव पूजा
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पुष्प
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अर्पण
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धतूरा
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पारंपरिक अर्पण
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अक्षत
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पूजा
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चंदन
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तिलक/पूजा
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दीपक
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आरती
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जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प, चंदन, अक्षत, धूप, दीपक और फल/नैवेद्य जैसी सामग्री रखी जा सकती है। धतूरा आदि सामग्री अपनी पारिवारिक या स्थानीय परंपरा के अनुसार ही अर्पित करें।
सावन के दूसरे सोमवार की पूजा विधि क्या है?
सावन के दूसरे सोमवार (sawan dusra somvar) को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें तथा व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। परंपरा के अनुसार दूध या पंचामृत से अभिषेक करके बेलपत्र, पुष्प, चंदन और अन्य सामग्री अर्पित करें। ॐ नमः शिवाय का जाप करें, सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में आरती व प्रार्थना करें। घर पर शिव पूजा की विस्तृत विधि समझने के लिए shivratri puja at home की यह गाइड भी उपयोगी हो सकती है।
व्रत का संकल्प लें
सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करके अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सावन सोमवार व्रत (sawan ka dusra somwar) का संकल्प लें।
शिवलिंग का अभिषेक करें
शिवलिंग पर पहले स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद परंपरा के अनुसार दूध या पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है।
बेलपत्र और पूजा सामग्री अर्पित करें
बेलपत्र, पुष्प, चंदन, अक्षत और अन्य पारंपरिक सामग्री अर्पित करें। पूजा करते समय शिव मंत्र का जाप करें।
मंत्र जाप करें
ॐ नमः शिवाय का जाप श्रद्धा के साथ करें। विशेष साधना या ज्योतिषीय उद्देश्य के लिए गुरु या योग्य आचार्य की सलाह लेना उचित है।
आरती और प्रार्थना करें
पूजा के अंत में शिवजी की आरती करें, व्रत कथा पढ़ें या सुनें और प्रसाद अर्पित करें।
दूसरे सोमवार को शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?
दूसरे सावन सोमवार (dusra sawan somvar) को शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प चढ़ाना सामान्य पूजा परंपरा है। शहद, काले तिल या अन्य सामग्री का प्रयोग अपनी परंपरा के अनुसार करें।
शिव पूजा से जुड़े आध्यात्मिक आभूषणों में shiv ji bracelet जैसे विकल्प भी देखे जा सकते हैं, हालांकि इन्हें पूजा सामग्री का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
सावन के दूसरे सोमवार का व्रत कैसे रखें?
सावन का दूसरा सोमवार का व्रत रखने के लिए सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्त्विक भोजन वाला व्रत रख सकते हैं। दिन में शिव की पूजा और मंत्र जाप करें तथा शाम को कथा और आरती करें। व्रत खोलने का समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार रखें।
व्रत का संकल्प
सुबह भगवान शिव का ध्यान करके सावन सोमवार व्रत (sawan dusra somvar) का संकल्प लें।
उपवास/फलाहार की पारंपरिक पद्धति
व्रत का स्वरूप व्यक्ति की धार्मिक परंपरा और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास न रखें।
पूजा और मंत्र जाप
शिवलिंग पर जल अर्पित करें और ॐ नमः शिवाय का जाप करें। शाम को प्रदोष काल में शिव पूजा की जा सकती है।
व्रत खोलना
कथा, आरती,संध्या काल के समय और पूजा के बाद भी आप अपने व्रत का समापन कर सकते है
सावन के दूसरे सोमवार को क्या करें और क्या न करें?
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क्या करें
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क्या न करें
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भगवान शिव की पूजा करें
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अनावश्यक विवाद से बचें
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जल और बेलपत्र अर्पित करें
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पूजा में अशुद्ध सामग्री न चढ़ाएं
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मंत्र और कथा का श्रवण करें
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दिखावे के लिए पूजा न करें
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जरूरतमंदों को दान करें
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नकारात्मक व्यवहार से बचें
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दूसरे सावन सोमवार की व्रत कथा
दूसरे सावन सोमवार (dusra sawan somvar) पर सोमवार व्रत कथा पढ़ने या सुनने की परंपरा है। प्कथा के अनुसार एक धनवान साहूकार था, जिसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी। वह संतान प्राप्ति की इच्छा से प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की पूजा और व्रत करता था।
उसकी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने भगवान शिव से साहूकार की मनोकामना पूरी करने का आग्रह किया। भगवान शिव ने उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया, लेकिन साथ ही बताया कि उसके पुत्र की आयु सीमित होगी।
समय आने पर साहूकार के घर पुत्र का जन्म हुआ। बालक के बड़े होने पर उसे उसकी सीमित आयु के बारे में पता चला। इसके बाद भी परिवार ने भगवान शिव की भक्ति और सोमवार व्रत जारी रखा। कथा के अनुसार भगवान शिव की कृपा से बालक को जीवनदान प्राप्त हुआ और परिवार की प्रसन्नता लौट आई।
इस कथा का मुख्य संदेश भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, भक्ति, संयम और विश्वास से जुड़ा है। इसलिए सावन का दूसरा सोमवार हो या कोई अन्य सोमवार, भक्त पूजा के बाद श्रद्धा से व्रत कथा पढ़ या सुन सकते हैं।
दूसरे सावन सोमवार के प्रमुख मंत्र
ॐ नमः शिवाय का जाप सावन सोमवार (sawan dusra somvar) की पूजा में प्रमुख रूप से किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इसका जाप कर सकते हैं। अलग-अलग powerful mantra और उनके धार्मिक महत्व के बारे में जानने के लिए विस्तृत गाइड भी पढ़ सकते हैं। महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शिव उपासना में किया जाता है, लेकिन विशेष अनुष्ठान के लिए योग्य गुरु की सलाह लेना उचित है।
सावन के पहले और दूसरे सोमवार में क्या अंतर है?
2026 में उत्तर भारत के अनुसार पहला सावन सोमवार 3 अगस्त और सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को है। दोनों दिनों में शिव पूजा और व्रत की मूल परंपरा समान है। 10 अगस्त की विशेषता यह है कि इसी दिन सोम प्रदोष का संयोग भी बन रहा है।
अगर आप पहले सोमवार की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि भी जानना चाहते हैं, तो sawan ka pehla somwar की यह विस्तृत जानकारी पढ़ सकते हैं।
Conclusion
सावन का दूसरा सोमवार 2026 (sawan ka dusra somwar) में 10 अगस्त को है। इस दिन व्रत, जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण, मंत्र जाप और व्रत कथा का पाठ किया जा सकता है। सोम प्रदोष के कारण शाम के प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष महत्व रहेगा। पूजा और पारण का सटीक समय अपने शहर के पंचांग के अनुसार देखें।